लखनऊ का सबसे बड़ा 'सरकारी' विरोधाभास: आपकी गाड़ी उठाने वाली 'नगर निगम की क्रेन' खुद अवैध! RTI के खुलासे से शासन-प्रशासन में हड़कंप
लखनऊ, 24 जून 2026: राजधानी लखनऊ की सड़कों पर कानून व्यवस्था और ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाले महकमों के पैर तले आज उस वक्त जमीन खिसक गई, जब एक सनसनीखेज आरटीआई (RTI) खुलासे ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया. जो गाड़ियां लखनऊ की सड़कों पर 'नो पार्किंग' या अवैध रूप से खड़े आम जनता के वाहनों को जबरन उठाकर ले जाती हैं (टॉइंग क्रेन), वे खुद कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं.
ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के अधिकारी जिस अनुबंधित क्रेन के दम पर जनता पर भारी-भरकम जुर्माना ठोकते हैं, वह क्रेन खुद बिना फिटनेस, बिना इंश्योरेंस और बिना टैक्स चुकाए बेखौफ दौड़ रही है.
RTI का महा-खुलासा: बिना कागजात के जनता पर 'अवैध' कार्रवाई?आरटीआई कार्यकर्ता श्री कर्मवीर आजाद द्वारा मांगी गई जन सूचना रिपोर्ट, जिसे आप आधिकारिक में देख सकते हैं, ने लखनऊ नगर निगम और ट्रैफिक विभाग के गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है.
परिवहन विभाग द्वारा दी गई बिंदुवार जानकारी के मुताबिक, इस पूरे खेल में शामिल मुख्य टॉइंग वाहन संख्या UP32FN7006 का काला सच यह है:
फिटनेस खत्म: इस वाहन की फिटनेस 19 जनवरी 2026 को ही समाप्त हो चुकी है.
बीमा (Insurance) गायब: गाड़ी का इंश्योरेंस 08 जनवरी 2026 के बाद रिन्यू नहीं कराया गया.
प्रदूषण (PUC) फेल: इसका प्रदूषण प्रमाण पत्र साल 2025 में ही दम तोड़ चुका है.
टैक्स की चोरी: सबसे बड़ी बात, इस गाड़ी का रोड टैक्स केवल 30 अगस्त 2025 तक ही वैध था. यानी यह सरकारी खजाने को भी सीधे चूना लगा रही है.
सस्पेंस की पराकाष्ठा: परिवहन विभाग ने साफ किया है कि इस गाड़ी पर पहले भी प्रवर्तन कार्रवाई (चालान) की जा चुकी है. इसके बावजूद नगर निगम के रसूखदार ठेकेदार सरकारी काम की धौंस दिखाकर इसी 'अवैध' क्रेन से रोजाना सैकड़ों नागरिकों की गाड़ियां उठा रहे हैं.
अधिकारियों का कड़ा रुख: "बख्शा कोई नहीं जाएगा"
इस मामले पर जब हमारी टीम ने संबंधित विभागों के आला अधिकारियों से तीखे सवाल किए, तो उनके बयानों ने इस लड़ाई को और बड़ा बना दिया है:
पी.के. सिंह ( ARTO प्रशासन, लखनऊ):
"कानून के आगे कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। वाहन चाहे किसी भी व्यक्ति का हो—चाहे वह खुद जिला अधिकारी (DM) का हो, मेरा हो, किसी उच्च अधिकारी का हो या फिर किसी माननीय (राजनेता) का ही क्यों न हो; अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया और कुछ भी गलत हुआ, तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
प्रभात पांडे (RTO प्रवर्तन, लखनऊ):
"यह मामला सीधे तौर पर नियमों की अवहेलना का है। मैं लखनऊ नगर निगम को एक कड़ा पत्र जारी कर रहा हूँ। नगर निगम के नाम पर जितने भी वाहन रजिस्टर्ड हैं, और उनके अंतर्गत जितने भी अनुनीति या अनुबंध पर चल रहे (Contractual) वाहन हैं, यदि उनमें से कोई भी बिना वैध कागजातों के गलत तरीके से सड़क पर पाया गया, तो उन सभी पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
जब 'अपर नगर आयुक्त' ने काटा फोन... प्रशासनिक ढुलमुल रवैया आया सामने!
इस संवेदनशील मामले पर जब शासन-प्रशासन के अन्य जिम्मेदार चेहरों से जवाब मांगने की कोशिश की गई, तो जो तस्वीर सामने आई वह हैरान करने वाली थी:
DCP ट्रैफिक से संपर्क का प्रयास: जब डीसीपी ट्रैफिक से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, तो उनके पीआरओ (PRO) ने फोन उठाया। उन्होंने अधिकारी का बचाव करते हुए कहा कि, "मैडम अभी एक बेहद महत्वपूर्ण मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए वार्ता संभव नहीं है। आप कल आकर किसी भी समय मैडम से इस विषय पर आधिकारिक बाइट ले सकते हैं।"
नगर आयुक्त: पूरे प्रयास के बाद भी नगर आयुक्त महोदय का नंबर उपलब्ध नहीं हो सका।
अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव का रवैया: जब हमारी टीम ने अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव जी से फोन पर संपर्क साधा और इस घोटाले के बारे में पूछना चाहा, तो उन्होंने अपनी अत्यधिक व्यस्तता और मजबूरी जताते हुए पूरी बात सुने बिना ही बीच में फोन काट दिया।
'ठेकेदार तंत्र' सरकार से भी बड़ा है?
यह सिर्फ एक गाड़ी की फिटनेस या टैक्स का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता के आत्मसम्मान और प्रशासनिक शुचिता पर चोट है। एक आम नागरिक की गाड़ी अगर 5 मिनट के लिए भी गलत खड़ी हो जाए, तो नगर निगम और पुलिस की क्रेनें उसे बिना सोचे-समझे उठा ले जाती हैं और हजारों का जुर्माना वसूलती हैं।
बड़ा सवाल: लेकिन जब खुद कानून का पालन कराने वाली क्रेन ही 'अपराधी' निकली, तो उस पर कार्रवाई कौन करेगा? ठेकेदारों की इतनी हिम्मत कि वे बिना टैक्स, बिना बीमा और बिना फिटनेस की गाड़ियां सरकारी अनुबंध पर दौड़ा रहे हैं और बड़े अधिकारी बात सुनने तक को तैयार नहीं हैं। क्या शासन इस 'ठेकेदार-अफसर' सिंडिकेट पर नकेल कसेगा? इस महा-खुलासे के बाद अब गेंद पूरी तरह उत्तर प्रदेश शासन के पाले में है!