पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- 'अंत्योदय' की विचारधारा राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव
नई दिल्ली / एसजेएम 24 न्यूज़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (25 सितंबर) एकात्म मानववाद के प्रणेता और राष्ट्रसेवा के सच्चे साधक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन किया है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान (अंत्योदय) को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया और सभी देशवासियों से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
'अंत्योदय' से मिलती है जनकल्याण की प्रेरणा
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने संदेश में लिखा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने समाज के सबसे पिछड़े और जरूरतमंद व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की जो 'अंत्योदय' की विचारधारा दी है, वह आज भी जनकल्याण के कार्यों के लिए एक अद्भुत प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इस विशेष अवसर पर हम सब उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लें।
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्
इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक विशेष संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया, जिसके जरिए उन्होंने सफलता, नवाचार (Innovation) और पुरुषार्थ (कड़ी मेहनत) के महत्व को रेखांकित किया:
"यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा।
इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥"
अर्थात: किसी भी व्यक्ति का प्रयास और लगन जितनी अधिक होती है, उसे सफलता उतनी ही जल्दी प्राप्त होती है।
भाग्य से नहीं, निरंतर प्रयास और साहस से मिलती है सफलता
प्रधानमंत्री ने इस सुभाषितम् की व्याख्या करते हुए कहा कि नवाचार (Innovation) और बड़ी सफलताएं कभी भी केवल भाग्य के भरोसे नहीं मिलतीं, बल्कि इसके पीछे निरंतर प्रयास, समर्पित कार्य, साहस और नए विचारों को वास्तविकता में बदलने का दृढ़ संकल्प होता है। यही वो मार्ग है जो किसी भी व्यक्ति या राष्ट्र को प्रगति के पथ पर आगे ले जाता है।