प्रभावी वन प्रबंधन: नई दिल्ली में JICA के सहयोग से कार्यशाला शुरू, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कही बड़ी बातें
नई दिल्ली / एसजेएम 24 न्यूज़
केंद्रीय पर्यावरण, फॉरेस्ट एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में 'प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन' विषय पर आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस कार्यशाला का आयोजन पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से किया गया है। इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ JICA इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वन विभागों के अधिकारी, अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
क्या है क्षमता संवर्धन परियोजना (2025-26 से 2031-32)?
यह महत्वाकांक्षी परियोजना 2025-26 से 2031-32 के दौरान यानी सात वर्षों तक देश के सभी राज्यों में कार्यान्वित की जाएगी। इस पर कुल 537.10 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसमें JICA का योगदान 440.42 करोड़ रुपये और भारत सरकार का हिस्सा 96.68 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वन और वन्यजीव प्रबंधन की बदलती जरूरतों, उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों और फ्रंटलाइन (अग्रिम पंक्ति) वन कर्मियों की क्षमताओं को मजबूत करना है। इसमें नए भागीदार राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और पूर्व से चली आ रही परियोजनाओं वाले राज्यों को भी सहायता मिलेगी।
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के संबोधन की मुख्य बातें:
स्थानीय ज्ञान और तकनीक का समन्वय: मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि क्षमता निर्माण केवल क्लासरूम ट्रेनिंग तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें आधुनिक तकनीकों, जमीनी स्तर के सर्वोत्तम उपायों और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान व अनुभव को शामिल किया जाना चाहिए।
वनाग्नि (जंगल की आग) प्रबंधन: वनाग्नि को एक वैश्विक चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में जमीनी क्षमताओं को बढ़ाने की असीम क्षमता रखती है।
क्षेत्र-विशिष्ट मॉड्यूल: उन्होंने स्थानीय चुनौतियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल विकसित करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया।
JICA इंडिया का दृष्टिकोण और तीन दशकों की साझेदारी
कार्यशाला में बोलते हुए JICA इंडिया कार्यालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि श्री एइजी वाकामात्सु ने कहा कि भारत के साथ वानिकी क्षेत्र में जेआईसीए की साझेदारी लगभग तीन दशकों पुरानी है, जिससे अब तक 7 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के दूसरे चरण (2025-26 से 2031-32) में लकड़ी के प्रसंस्करण, आजीविका सृजन, डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation) और सहयोगात्मक अकादमिक अनुसंधान पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। JICA सतत वन प्रबंधन के लिए भारत की केंद्र और राज्य सरकारों के साथ अपने सहयोग को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कार्यशाला में इन प्रमुख आयामों पर हुई चर्चा
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में निम्नलिखित आयामों पर रूपरेखा प्रस्तुत की गई:
व्यावहारिक तकनीकी समाधान के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना।
जमीनी स्तर पर नई तकनीकों के उपयोग के लिए पायलट परियोजनाएं शुरू करना।
वानिकी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से मजबूत करना।
सार्क और अन्य विकासशील देशों के साथ बेहतरीन कार्यप्रणालियों (Best Practices) को साझा करना।