UP की सियासत में 'ब्राह्मण कार्ड' का महा-विस्फोट: कांग्रेस का दावा, "योगी राज में 1000 से अधिक ब्राह्मणों का कत्लेआम"
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बिसात पर एक बार फिर 'ब्राह्मण' अस्मिता का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए एक ऐसा सियासी बम फोड़ा है, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में खलबली मचा दी है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के इस हमले ने प्रदेश के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।
"अन्याय और आंसू" की सरकार: कांग्रेस
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि जिस ब्राह्मण समाज ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पर अटूट विश्वास जताया था, उसी समाज को इस सरकार ने बदले में केवल 'अन्याय और आंसू' दिए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए इसे 'जातिवादी मानसिकता' का परिणाम बताया है।
गंभीर आरोप: "1000 से ज्यादा हत्याएं और अपराधियों को संरक्षण"
कांग्रेस के तेजतर्रार प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा:
"योगी आदित्यनाथ सरकार में जातिवादी मानसिकता के तहत ब्राह्मण समाज पर भयंकर अत्याचार हुआ है। इस सरकार के कार्यकाल में 1,000 से ज्यादा ब्राह्मणों की बेरहमी से हत्याएं की गई हैं। शर्मनाक यह है कि सरकार अपराधियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी नजर आती है।"
अंशू अवस्थी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण आज भाजपा राज में खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहा है और अब वह अपने लिए विकल्पों की तलाश कर रहा है।
"2027 में बदलेगी पूरी पिक्चर"
कांग्रेस प्रवक्ता ने साल 2024 के लोकसभा परिणामों का हवाला देते हुए भाजपा को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं ने 'इंडिया गठबंधन' को अपना आशीर्वाद देकर भाजपा को उनकी हैसियत दिखा दी है। कांग्रेस ने दावा किया है कि 2027 के रण में ब्राह्मण समाज पूरी तरह कांग्रेस के पाले में खड़ा होगा और भाजपा सरकार के अहंकार को नेस्तनाबूद कर देगा।
क्या फिर बदलेगा यूपी का राजनीतिक समीकरण?
यूपी की सत्ता का रास्ता हमेशा से ब्राह्मण और दलित समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। कांग्रेस द्वारा 'ब्राह्मण उत्पीड़न' का मुद्दा उठाकर सीधे भाजपा के कोर वोट बैंक पर चोट करना, पार्टी के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन सकता है। जिस आक्रामकता के साथ कांग्रेस ने आंकड़ों और आरोपों की झड़ी लगाई है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ने वाला है।