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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति के संरक्षण और उसके सम्मान को मानवता के कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि मानव जाति की भलाई प्राकृतिक जगत की रक्षा करने और उसके साथ सामंजस्य बिठाकर जीने में ही निहित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि मानव जाति की भलाई प्रकृति की रक्षा और उसके सम्मान में ही निहित है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं हमें प्राकृतिक जगत के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने और धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती हैं।

28-07-2026 07:51:47 2 Views

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति के संरक्षण और उसके सम्मान को मानवता के कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि मानव जाति की भलाई प्राकृतिक जगत की रक्षा करने और उसके साथ सामंजस्य बिठाकर जीने में ही निहित है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सदियों पुरानी समृद्ध परंपराएं और संस्कृति भी हमें इस धर्मसम्मत आचरण को अपनाने का मार्ग दिखाती हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथ और परंपराएं हमेशा से ही प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देते आए हैं।

संस्कृत सुभाषित के माध्यम से दिया संदेश

प्रकृति संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित भी साझा किया:

“लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥

दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥”

सुभाषित का भावार्थ

इस सुभाषित का गहरा संदेश यह है कि प्रकृति और धर्म के साथ अनुकूलता एवं सामंजस्य बनाकर व्यतीत किया गया जीवन ही वास्तविक सुख, सुरक्षा और सर्वतोमुखी कल्याण का आधार है।

इस श्लोक के माध्यम से यह मंगलकामना की गई है कि:

  • दिशाओं के रक्षक देवता (लोकपाल) तथा भगवान इंद्र के नेतृत्व में सभी प्रमुख देवगण,

  • वर्ष की छहों ऋतुएं, सभी महीने, संपूर्ण वर्ष, रात्रियां,

  • दिन और सभी शुभ मुहूर्त सदैव हर मनुष्य के लिए मंगल और समृद्धि प्रदान करें।

  • साथ ही वेद, पवित्र स्मृतियां और धर्म हर प्रकार से तथा सभी स्थानों पर सबकी रक्षा करें।

प्रकृति और संस्कृति का अटूट रिश्ता

प्रधानमंत्री के इस संदेश से स्पष्ट है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक आधुनिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। जब मनुष्य प्रकृति का आदर करता है और उसके नियमों का पालन करता है, तो संपूर्ण सृष्टि उसका मंगल और कल्याण करती है।

— एसजेएम 24 न्यूज़

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति के संरक्षण और उसके सम्मान को मानवता के कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि मानव जाति की भलाई प्राकृतिक जगत की रक्षा करने और उसके साथ सामंजस्य बिठाकर जीने में ही निहित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि मानव जाति की भलाई प्रकृति की रक्षा और उसके सम्मान में ही निहित है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं हमें प्राकृतिक जगत के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने और धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती हैं।

28-07-2026 2 Views
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति के संरक्षण और उसके सम्मान को मानवता के कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि मानव जाति की भलाई प्राकृतिक जगत की रक्षा करने और उसके साथ सामंजस्य बिठाकर जीने में ही निहित है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सदियों पुरानी समृद्ध परंपराएं और संस्कृति भी हमें इस धर्मसम्मत आचरण को अपनाने का मार्ग दिखाती हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथ और परंपराएं हमेशा से ही प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देते आए हैं।

संस्कृत सुभाषित के माध्यम से दिया संदेश

प्रकृति संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित भी साझा किया:

“लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥

दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥”

सुभाषित का भावार्थ

इस सुभाषित का गहरा संदेश यह है कि प्रकृति और धर्म के साथ अनुकूलता एवं सामंजस्य बनाकर व्यतीत किया गया जीवन ही वास्तविक सुख, सुरक्षा और सर्वतोमुखी कल्याण का आधार है।

इस श्लोक के माध्यम से यह मंगलकामना की गई है कि:

  • दिशाओं के रक्षक देवता (लोकपाल) तथा भगवान इंद्र के नेतृत्व में सभी प्रमुख देवगण,

  • वर्ष की छहों ऋतुएं, सभी महीने, संपूर्ण वर्ष, रात्रियां,

  • दिन और सभी शुभ मुहूर्त सदैव हर मनुष्य के लिए मंगल और समृद्धि प्रदान करें।

  • साथ ही वेद, पवित्र स्मृतियां और धर्म हर प्रकार से तथा सभी स्थानों पर सबकी रक्षा करें।

प्रकृति और संस्कृति का अटूट रिश्ता

प्रधानमंत्री के इस संदेश से स्पष्ट है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक आधुनिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। जब मनुष्य प्रकृति का आदर करता है और उसके नियमों का पालन करता है, तो संपूर्ण सृष्टि उसका मंगल और कल्याण करती है।

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