प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए देशवासियों को अपने विचारों, वाणी और कर्मों में सदैव सकारात्मकता तथा कल्याणकारी भाव अपनाने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति जिस प्रकार के विचारों, शब्दों और कार्यों का निरंतर अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व, चरित्र और जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपने आधिकारिक पोस्ट में संस्कृत का यह सुभाषितम् साझा किया—
"कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥"
इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से जिस प्रकार के आचरण का निरंतर अभ्यास करता है, वही धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा बन जाता है और उसे उसी दिशा में आगे बढ़ाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों, संवाद और व्यवहार में सदैव कल्याणकारी, सकारात्मक और समाजहितकारी विषयों को ही स्थान देना चाहिए।
सकारात्मक सोच और आचरण का संदेश
प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यक्ति अपनी सोच, भाषा और व्यवहार को सकारात्मक बनाए रखे तो परिवार, समाज और राष्ट्र में सौहार्द, विश्वास और विकास का वातावरण मजबूत होता है।
प्रधानमंत्री समय-समय पर भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और संस्कृत साहित्य से जुड़े प्रेरक श्लोकों एवं विचारों को साझा करते रहे हैं। उनका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना तथा लोगों को नैतिक जीवन, सदाचार और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना है।
भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश
संस्कृत सुभाषितों में जीवन प्रबंधन, नैतिकता, कर्तव्य, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का गहन संदेश निहित होता है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह सुभाषित भी इसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जो बताता है कि मनुष्य का भविष्य उसके निरंतर अभ्यास, विचारों और कर्मों से निर्मित होता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश देशवासियों को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है। उनका आह्वान है कि प्रत्येक नागरिक अपने दैनिक जीवन में ऐसे विचार, वाणी और कर्म को अपनाए जो स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण में भी योगदान दें।
— एसजेएम 24 न्यूज़ डेस्क