अयोध्या में हाई-वोल्टेज ड्रामा: रामलला के दर्शन से रोके जाने पर भड़के अजय राय, ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की मांग से हड़कंप!
लखनऊ/अयोध्या, 30 जून 2026
उत्तर प्रदेश की सियासत में आज उस वक्त भूचाल आ गया, जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या जाने से ठीक पहले नाटकीय ढंग से हिरासत में ले लिया गया। अजय राय ने एक बेहद संवेदनशील और तीखा बयान जारी कर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र की बीजेपी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
गेस्ट हाउस की चारदीवारी के पीछे से आए इस बयान ने रामनगरी से लेकर राजधानी लखनऊ तक के सियासी गलियारों में सस्पेंस और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
"हम रामलला से बीजेपी-आरएसएस को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करने जा रहे थे"
अजय राय ने अपनी गिरफ्तारी पर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि वे आज कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रभु श्री राम के चरणों में शीश नवाने जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इतनी डरी हुई है कि उसने उन्हें गेस्ट हाउस में कैद कर दिया है।
अजय राय का सीधा हमला: "आज अयोध्या नगरी में बड़े पैमाने पर चंदा चोरी और जमीन घोटाले हो रहे हैं। हम तो सिर्फ भगवान राम से यह प्रार्थना करने जा रहे थे कि वे बीजेपी और आरएसएस (BJP-RSS) के लोगों को सद्बुद्धि दें। लेकिन इस दमनकारी सरकार ने हमें गिरफ्तार कर लिया।"
ट्रस्ट के बड़े चेहरों पर एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग: कांप उठी सियासत
कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ सीधे युद्ध का ऐलान कर दिया है। अजय राय ने सीधे नाम लेते हुए इन दिग्गजों पर मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है:
नृपेंद्र मिश्रा (अध्यक्ष, मंदिर निर्माण समिति)
चंपत राय (महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र)
अनिल मिश्रा (ट्रस्टी)
गोपाल राव और गोविंद गिरी > असली सस्पेंस: अजय राय ने मांग की है कि इस पूरे मामले में जिन छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर जेल भेजा गया है, उन्हें तुरंत पुलिस रिमांड पर लिया जाए और उनसे सच उगलवाया जाए। आखिर वे कौन से राज हैं, जिन्हें दबाने की कोशिश हो रही है?
"ट्रस्ट को तत्काल भंग करो, शंकराचार्यों को सौंपो कमान"
अजय राय ने इस विवाद को एक नया धार्मिक और राजनीतिक मोड़ देते हुए मांग की है कि वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में केवल उन लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जो वास्तव में धर्म से जुड़े हों और जिन्हें देश के पूज्य शंकराचार्यों द्वारा नामित किया गया हो।
अयोध्या की जमीन पर राम मंदिर निर्माण के बाद से ही विपक्ष लगातार भूमि खरीद और ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठाता रहा है। लेकिन अजय राय की इस अचानक गिरफ्तारी और सीधे चंपत राय व नृपेंद्र मिश्रा जैसे कद्दावर नामों पर एफआईआर की मांग ने इस लड़ाई को 'आर-पार' के मोड़ पर ला खड़ा किया है। गेस्ट हाउस में बंद अजय राय का अगला कदम क्या होगा? क्या कांग्रेस का यह बड़ा दांव उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई नया तूफान लाने वाला है? सस्पेंस गहरा गया है!