हाइवे पर 'ऑपरेशन चंडीगढ़': UP STF ने बीच रास्ते घेरी संदिग्ध पिकअप; खुला शराब तस्करी का वो राज जिससे हिल गए बड़े-बड़े सिंडिकेट!
लखनऊ/उन्नाव, 29 जून 2026 ब्यूरो रिपोर्ट, स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF)
रात का सन्नाटा, सुनसान हाइवे और एक तेज रफ्तार पिकअप डाला... जो दिखने में बेहद सामान्य था, लेकिन उसके भीतर छिपा था एक ऐसा खौफनाक सच जो दो राज्यों की पुलिस की नाक में दम किए हुए था। यूपी एसटीएफ (STF) के कमांडो कई दिनों से एक ऐसे 'अदृश्य नेटवर्क' का पीछा कर रहे थे, जो देश के एक कोने से दूसरे कोने तक अवैध नशे का काला साम्राज्य फैला रहा था। आखिरकार, वो सस्पेंस खत्म हुआ और एसटीएफ ने उस वक्त तस्करों की रीढ़ तोड़ दी, जब गाड़ी सीधे उनके बिछाए जाल में आकर फंस गई।
यूपी एसटीएफ ने अंतर्राज्यीय स्तर पर चल रहे एक बहुत बड़े अवैध शराब तस्करी गिरोह के मुख्य गुर्गे को दबोचकर इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश कर दिया है।
औरास में एसटीएफ का 'विशाल चक्रव्यूह': ऐन वक्त पर दबोचा!
विगत काफी समय से खुफिया एजेंसियों को इनपुट्स मिल रहे थे कि पंजाब और चंडीगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से होते हुए 'ड्राय स्टेट' बिहार राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध अंग्रेजी शराब की खेप भेजी जा रही है।
इस इनसाइड स्टोरी का सस्पेंस तब चरम पर पहुंचा जब सत्यसेन यादव (अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उप्र लखनऊ) के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम ने जाल बिछाया। मुखबिर की सटीक सूचना पर एसटीएफ के जाँबाजों ने जनपद उन्नाव के थाना औरास अंतर्गत ग्राम टिकरा बाव के पास घेराबंदी की। जैसे ही संदिग्ध पिकअप डाला संख्या UP32 WN 6732 वहां पहुंची, एसटीएफ ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।
142 पेटियों का वो 'गुप्त तहखाना': बोतल-दर-बोतल खुला राज
जब गाड़ी की तलाशी शुरू हुई, तो पुलिस टीम की आंखें फटी की फटी रह गईं। जिसे आम गाड़ी समझा जा रहा था, उसके भीतर अवैध शराब की पूरी मंडी सजी हुई थी।
2,808 बोतलों का जखीरा: पिकअप के भीतर से अलग-अलग नामी ब्रांड्स की कुल 142 पेटियां बरामद हुईं। जब गिनती की गई तो छोटी-बड़ी साइज की कुल 2,808 बोतलें निकलीं।
चंडीगढ़ का सीक्रेट कोड: बरामद की गई सभी बोतलों पर साफ अक्षरों में 'FOR SALE IN CHANDIGARH ONLY' लिखा हुआ था। यानी टैक्स चोरी कर इसे तस्करी के जरिए खपाने का पूरा प्लान था।
उन्नाव का 'रंजीत': सिंडिकेट का वो मोहरा जो उगल रहा है राज
एसटीएफ की गिरफ्त में आए इस शातिर तस्कर की पहचान रंजीत के रूप में हुई है, जो मूल रूप से जनपद उन्नाव का ही रहने वाला है। वह स्थानीय रास्तों का फायदा उठाकर पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था।
जांच में बड़ा खुलासा: शुरुआती पूछताछ में यह बेहद संवेदनशील बात सामने आई है कि यह शराब बिहार के उन इलाकों में पहुंचाई जानी थी जहां शराबबंदी के कारण इसके दाम तीन से चार गुना ऊंचे मिलते हैं। रंजीत तो सिर्फ एक मोहरा है, इस पूरे खेल के पीछे बैठे असली 'मास्टरमाइंड' और सफेदपोशों तक पहुंचने के लिए एसटीएफ अब रंजीत की कॉल डिटेल्स और बैंक खातों को खंगाल रही है।
इस बड़ी कामयाबी ने न सिर्फ करोड़ों रुपये के टैक्स घोटाले को रोका है, बल्कि बिहार और यूपी के बीच चल रहे मौत के इस काले कारोबार पर भी एक बहुत बड़ा प्रहार किया है।
इस सिंडिकेट के पीछे और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं? एसटीएफ की अगली रेड कहां होगी? पल-पल की एक्सक्लूसिव अपडेट्स के लिए तुरंत जुड़े रहिए हमारे साथ।