मैक्स हॉस्पिटल में 'जिंदा लाश' का खेल? मौत के बाद भी शव को वेंटिलेटर पर रखने का सनसनीखेज आरोप; बिल बढ़ाने के खूनी खेल का सच क्या?
लखनऊ, 27 जून 2026 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिकित्सा जगत को झकझोर कर रख देने वाली एक बेहद संवेदनशील और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। शहर के प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाके में स्थित मैक्स हॉस्पिटल पर एक पीड़ित परिवार ने ऐसे गंभीर और अमानवीय आरोप लगाए हैं, जिसने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गहरा सस्पेंस और आक्रोश पैदा कर दिया है।
आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने चंद रुपयों की खातिर इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं और एक मृत मरीज को कई घंटों तक वेंटिलेटर पर जिंदा दिखाने का नाटक किया।
ICU की 6वीं मंजिल का वो 'खौफनाक रहस्य' क्या है?
पीड़ित परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, मरीज ओम प्रकाश सिंह गंभीर हालत में मैक्स हॉस्पिटल की छठी (6th) मंजिल पर स्थित हाई-टेक आईसीयू (ICU) में भर्ती थे। परिजनों का दावा है कि डॉक्टरों के इलाज के दौरान ही ओम प्रकाश सिंह की सांसें थम चुकी थीं और उनकी मौत हो चुकी थी।
लेकिन, परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। आरोप है कि इसके बाद शुरू हुआ अस्पताल का वो 'सीक्रेट गेम', जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।
परिजनों का सीधा और तीखा दावा: सिर्फ बिल बढ़ाने की साजिश!
"हमारे मरीज की मौत बहुत पहले हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ 'इलाज के नाम पर लाखों का बिल बढ़ाने के लिए' शव को जबरन वेंटिलेटर पर रखा।" पीड़ित परिवार ने भर्राई आंखों और गुस्से से कांपती आवाज में यह आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने मरीज की स्थिति देखनी चाही, तो उन्हें गुमराह किया जाता रहा।
निष्पक्ष जांच की मांग; क्या बेनकाब होगा मेडिकल माफिया?
इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी तनाव का माहौल देखा गया। परिजनों ने इस पूरे मामले में चिकित्सा विभाग, पुलिस और शासन से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। पीड़ित पक्ष न्याय के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और सच्चाई को सामने लाने के लिए एक हेल्पलाइन संपर्क नंबर भी जारी किया गया है, ताकि इस तरह के कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठाई जा सके।
यह मामला सिर्फ एक निजी अस्पताल और एक परिवार के बीच के विवाद का नहीं है। यह सीधे तौर पर जीवनदायिनी व्यवस्था और 'मेडिकल एथिक्स' (चिकित्सा नैतिकता) पर लगा एक बहुत बड़ा और गहरा दाग है। अगर परिजनों के आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह कृत्य किसी जघन्य अपराध से कम नहीं है। क्या वाकई छठी मंजिल के उस आईसीयू में मशीनों के सहारे सिर्फ बिल मीटर घुमाया जा रहा था? या फिर इसके पीछे कोई और तकनीकी पहलू है? इस खौफनाक सस्पेंस से पर्दा उठना अभी बाकी है, और प्रशासन की रिपोर्ट पर अब पूरे शहर की निगाहें टिकी हैं!